"नमस्ते, मैं लिपिका हूँ।
10 साल पहले यही मेरे लिए मुसीबत बन गई थी। मेरा पूर्व पति एक बेहद शक्की मिज़ाज का इंसान था। अगर मैं ज़रा सा भी सज-संवर लूँ, या साफ़ कपड़े भी पहन लूँ, तो उस पर पागलपन सवार हो जाता था। वह बिना किसी वजह के मेरे साथ मारपीट करता था। मुझे लगने लगा था कि शायद मेरी ज़िंदगी अब यही है—घुट-घुट कर जीना और पिटना।लेकिन एक दिन मेरे सब्र का बांध टूट गया। मैंने सोचा, 'अगर मरना ही है, तो आज़ाद होकर मरूँगी, इस क़ैद में नहीं।' मैंने तलाक लिया और घर से निकल गई।
उस वक़्त मैंने कसम खाई कि अब मैं किसी के रहमो-करम पर नहीं जीऊंगी। मैंने दिन-रात एक कर दिया।अपना बिज़नेस खड़ा किया। आज 10 साल बाद मेरे पास गाड़ियां हैं, बड़ा बंगला है और वह सब कुछ है जो दौलत से खरीदा जा सकता है।
मैंने यह महसूस किया है कि पैसे से आप 'सुविधा' खरीद सकते हैं, पर 'अपनापन' नहीं। जब बीमार पड़ती हूँ, तो नौकर दवा तो दे देते हैं, पर माथे पर हाथ रखने वाला कोई नहीं होता। इसीलिए, आज मैं फिर से एक जीवनसाथी की तलाश कर रही हूँ। मुझे एक सच्चा दोस्त चाहिए।
Primary information
— Marriage
More Information
— Headaches
Family Information
— 2 Sisters (Married)
I am looking for
— Only for my community
— 51-60
— Job in Govt. Sector
— Job in private firm
— Business Owner
— Self Employee
— Other
— Divorced
— Widow /Widower
— Saperated
— Married
मुझे कोई ऐसा नहीं चाहिए जो मेरा 'खर्च' उठाए, क्योंकि मैं खुद सक्षम हूँ। मुझे एक सच्चा दोस्त चाहिए। एक ऐसा इंसान जो मेरे अतीत के ज़ख्मों को समझे, जो मेरे साथ हँस सके, और जो मुझ पर शक नहीं, बल्कि भरोसा करे। मुझे अब एक 'पति' से ज़्यादा एक 'हमसफ़र' की तलाश है।"




















