शादी में कौन-कौन सी रस्में होती है?

शादी में कौन-कौन सी रस्में होती है?

हिंदू विवाह के अंतर्गत होने वाली रस्में आमतौर पर तीन दिनों तक होती हैं और प्रत्येक दिन अलग-अलग रस्में होते हैं। तीसरे दिन मुख्य समारोह और स्वागत समारोह होता है। वहीं दूसरे दिन संगीत में अतिथि शामिल होते हैं। गणेश पूजा से शादी के कार्यक्रमों की शुरुआत होती है जिसमें केवल करीबी परिवार ही रहते है। 

सगाई समारोह

यह समारोह आमतौर पर शादी से कुछ महीने पहले होता है। समारोह के दौरान, दोनों परिवारों के पिता अपने बच्चे के औपचारिक शादी की घोषणा करते हैं। इसके बाद दूल्हा और दुल्हन अपनी सगाई के अंगूठी का आदान-प्रदान एक दूसरे को अंगूठी पहनाकर करते हैं।

मेहंदी समारोह

इस दिन दुल्हन के हाथ और पैरों में मेंहदी लगाया जाता है। कुछ एक घरों में रस्म के हिसाब से दुल्हें को भी मेहंदी लगाया जाता है। यह रस्म शाम को परिवार के सदस्यों के सामने होता है। अतिथि भी आते हैं और बहुत सारा नृत्य और संगीत भी होता है। इस रस्म में दुल्हन के परिवार की महिलाएं भी मेहंदी लगवाती है और दुल्हें के परिवार की महिलाएं भी मेहंदी लगाती है।

संगीत समारोह

परंपरागत रूप से, संगीत समारोह औपचारिक सगाई कार्यक्रम का एक हिस्सा होता है, हालांकि हाल ही के दिनों में, यह व्यक्तिगत रूप से आयोजित किया जाता है। 

इस तरह संगीत सेलिब्रेशन के साथ शादी का मजा एक दिन और बढ़ जाता है। पहले संगीत समारोह केवल उत्तर भारतीय हिंदू विवाह का हिस्सा थे, अब इस मजेदार समारोह ने दक्षिण भारत में भी अपनी जगह फीक्स कर ली है।

हल्दी समारोह

इस समारोह में हल्दी का एक पेस्ट दूल्हा और दुल्हन के शरीर पर उनकी शादी के दिन के पहले या शादी वाले दिन सुबह लगाया जाता है। भारत के कुछ राज्यों में मेहंदी की रस्म के बाद यह समारोह आयोजित किया जाता है।

हल्दी समारोह का सीधा संबंध दूल्हा और दुल्हन को उनके बड़े दिन के लिए सुशोभित करने के लिए रखा जाता है। पीला रंग भी शुभ माना जाता है और इस प्रकार बुराई को दूर करने के लिए यह रस्म रखा जाता है।

जयमाला समारोह

इस समारोह के दौरान जोड़े एक-दूसरे के परिवारों में एक-दूसरे का स्वागत करते हुए, ताजी मालाओं का आदान-प्रदान करते हैं। यह आत्माओं से जुड़ने और लंबे समय तक एक दूसरे के जीवन में शामिल होने का रस्म है।

कन्यादान 

शादी का सबसे अहम रस्म होता है। जो एक पिता के लिए बहुत भावुक पल होता है। जब उनको अपनी बेटी का दायित्व दामाद को सौंपना पड़ता है।

सात फेरों का बंधन

सात वचन,सात फेरे एवं सात जन्मों का बंधन शादी का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। जिसमें पंडित मंत्र पढ़ते हैं और वर एवं वधु से सात वचन कहने को कहते हैं। प्रथम चार फेरे वर लेते हैं और अंतिम तीन फेरे वधु लेती है।

विदाई समारोह

विदाई एक भावनात्मक घटना है जो शादी के पूरा होने का प्रतीक है। यह शादी का एक अभिन्न अंग है, जहां आंसू भरी आंखों वाली दुल्हन दरवाजे से बाहर निकलती है और अपने सिर पर पांच मुट्ठी चावल फेंकती है जो धन और समृद्धि को दर्शाती है। 

एक तरह से, यह अनुष्ठान इस बात का प्रतीक है कि दुल्हन ने अपने माता-पिता से इतने वर्षों में जो कुछ भी प्राप्त किया है, उसे वापस कर दिया है। जैसे ही वह कार/वाहन में जाती है, दुल्हन के भाई और चचेरे भाई कार को धक्का देते हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि भाई उसके पति के साथ एक नया जीवन शुरू करने में उसकी मदद कर रहे हैं।

One comment

  • Pooranlal

    March 2, 2022 at 5:19 pm

    Pooranlalpilibhit Uttar Pradesh ka Rahane wala hai inter ki padhai ki hai Hindu Rajput caste hamari hai shakahari bhojan karta hun 38 salumar hai 9411974632